राजस्थान की वीर भूमि चित्तौड़गढ़ केवल किलों और महलों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी गहरी आध्यात्मिक आस्था के लिए भी जानी जाती है। यदि आप मेवाड़ की यात्रा पर हैं और आपने Sanwaria Seth Temple के दर्शन नहीं किए, तो आपकी यात्रा अधूरी मानी जाएगी।
एक टूरिज्म एक्सपर्ट के तौर पर, मैंने पिछले 10 वर्षों में राजस्थान के कोने-कोने को देखा है, लेकिन जो ‘पॉजिटिव वाइब्स’ और ‘अमीरी’ का अहसास मंडफिया के इस मंदिर में होता है, वह अद्वितीय है। लोग इन्हें केवल भगवान नहीं, बल्कि अपना “बिजनेस पार्टनर” (Business Partner) मानते हैं।
Contents
- 1 सांवलिया सेठ मंदिर का गौरवशाली इतिहास (History of Sanwaria Seth Temple)
- 2 Sanwaria Seth Temple की वास्तुकला: राजस्थानी शिल्प कला का बेजोड़ नमूना
- 3 सांवलिया सेठ को क्यों कहते हैं ‘व्यापारियों का सेठ’?
- 4 Sanwaria Seth Temple Darshan Timings (दर्शन का समय)
- 5 प्रमुख त्यौहार और मेले (Festivals at Sanwaria Seth)
- 6 कैसे पहुँचें सांवलिया सेठ मंदिर? (How to Reach)
- 7 प्रमुख शहरोँ से Sanwaria Seth Temple की दूरी
- 8 यात्री सुविधाएं और रुकने की व्यवस्था (Accommodation)
- 9 3-दिवसीय मेवाड़ दर्शन: ऐतिहासिक और आध्यात्मिक यात्रा
- 10 निष्कर्ष (Conclusion)
- 11 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
सांवलिया सेठ मंदिर का गौरवशाली इतिहास (History of Sanwaria Seth Temple)
इस मंदिर की उत्पत्ति की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है। बात साल 1840 की है। लोक कथाओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, बागुंड गाँव के एक ग्वाले भोलाराम गुर्जर को एक रात सपना आया कि छापर गाँव की जमीन में तीन अद्भुत मूर्तियाँ दबी हुई हैं।
अगले दिन जब उस जगह की खुदाई की गई, तो सचमुच भगवान श्री कृष्ण की तीन अत्यंत सुंदर काली मूर्तियाँ प्रकट हुईं।
- सबसे बड़ी मूर्ति मंडफिया (Mandaphia) में स्थापित की गई, जिसे आज हम मुख्य Sanwaria Seth Temple के नाम से जानते हैं।
- दूसरी मूर्ति भादसोड़ा (Bhadsora) में स्थापित हुई।
- तीसरी मूर्ति बागुंड-छापर (Baagund-Chhapar) के उसी स्थान पर है जहाँ वह प्रकट हुई थी।
पर्यटन विशेषज्ञ के रूप में मेरा सुझाव है कि यदि आपके पास समय हो, तो इन तीनों मंदिरों के दर्शन करें, क्योंकि इन तीनों का आध्यात्मिक जुड़ाव एक ही घटना से है।
Sanwaria Seth Temple की वास्तुकला: राजस्थानी शिल्प कला का बेजोड़ नमूना
मंडफिया का यह मंदिर अपनी भव्यता के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है। इसका निर्माण गुलाबी सैंडस्टोन और सफेद संगमरमर से किया गया है। मंदिर की दीवारों पर की गई नक्काशी भगवान कृष्ण की लीलाओं को जीवंत कर देती है।
जब आप मुख्य गर्भगृह में प्रवेश करते हैं, तो भगवान की सांवली (Dark-hued) प्रतिमा को देखकर आप अपनी सुध-बुध खो बैठेंगे। यहाँ की छत पर किया गया कांच का काम और चांदी के द्वार इसकी संपन्नता और भक्तों की श्रद्धा को दर्शाते हैं।
सांवलिया सेठ को क्यों कहते हैं ‘व्यापारियों का सेठ’?
यह Sanwaria Seth Temple की सबसे दिलचस्प बात है। यहाँ आने वाले भक्त भगवान को अपना व्यापारिक साझेदार मानते हैं।
- हिस्सेदारी की परंपरा: राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के हजारों व्यापारी अपने लाभ का एक निश्चित हिस्सा (जैसे 2%, 5% या 10%) ‘सेठ’ के नाम निकालते हैं।
- करोड़ों का चढ़ावा: यही कारण है कि इस मंदिर का दान पात्र जब भी खुलता है, तो उसमें से करोड़ों की नकदी, सोना और चांदी निकलता है।
- भरोसे का व्यापार: लोग मानते हैं कि जब से उन्होंने सांवलिया जी को अपना पार्टनर बनाया है, उनका बिजनेस दिन-दोगुनी तरक्की कर रहा है।
Sanwaria Seth Temple Darshan Timings (दर्शन का समय)
अगर आप अपनी यात्रा प्लान कर रहे हैं, तो समय का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। मंदिर दोपहर में विश्राम के लिए बंद रहता है।
| कार्यक्रम | समय (Morning) | समय (Evening) |
| मंदिर द्वार खुलना | सुबह 05:30 AM | – |
| मंगला आरती | सुबह 05:30 AM | – |
| राजभोग आरती | सुबह 10:00 – 11:15 AM | – |
| संध्या आरती | – | शाम 08:00 – 09:15 PM |
| शयन आरती | – | रात 11:00 PM |
एक्सपर्ट टिप: राजभोग आरती के समय मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ होती है, लेकिन उस समय का ऊर्जा स्तर (Energy Level) अद्भुत होता है। यदि आप शांति से दर्शन करना चाहते हैं, तो सुबह 6:00 से 8:00 के बीच जाएँ।
प्रमुख त्यौहार और मेले (Festivals at Sanwaria Seth)
यूँ तो यहाँ हर दिन उत्सव जैसा होता है, लेकिन कुछ विशेष अवसर ऐसे हैं जब आपको यहाँ की रौनक देखनी चाहिए:
- जलझूलनी एकादशी (Jaljhulani Ekadashi): यह यहाँ का सबसे बड़ा मेला है। भगवान के ‘बेवाण’ (विमान) को गाजे-बाजे के साथ सरोवर तक ले जाया जाता है। लाखों की संख्या में भक्त उमड़ते हैं।
- कृष्ण जन्माष्टमी: भगवान का जन्मदिन यहाँ शाही अंदाज में मनाया जाता है।
- होली और दीपावली: इन त्योहारों पर पूरे मंदिर को दीपों और फूलों से सजाया जाता है।
कैसे पहुँचें सांवलिया सेठ मंदिर? (How to Reach)
Sanwaria Seth Temple तक पहुँचना बहुत आसान है क्योंकि यह चित्तौड़गढ़-उदयपुर हाईवे पर स्थित है।
- हवाई मार्ग द्वारा: सबसे नजदीकी एयरपोर्ट उदयपुर (Maharana Pratap Airport) है, जो यहाँ से लगभग 65-70 किमी दूर है। वहाँ से आप टैक्सी ले सकते हैं।
- रेल मार्ग द्वारा: सबसे प्रमुख रेलवे स्टेशन चित्तौड़गढ़ (Chittorgarh Junction) है। चित्तौड़गढ़ से सांवलिया सेठ की दूरी लगभग 35-40 किमी हैं । चित्तौड़गढ़ भारत के सभी प्रमुख शहरों से रेल द्वारा जुड़ा है।
- सड़क मार्ग द्वारा: उदयपुर या चित्तौड़गढ़ से निजी बसें, टैक्सी और राजस्थान रोडवेज की बसें निरंतर उपलब्ध रहती हैं।
प्रमुख शहरोँ से Sanwaria Seth Temple की दूरी
| शहर का नाम | अनुमानित दूरी (किमी में) | यात्रा का समय (लगभग) |
| चित्तौड़गढ़ | 40 किमी | 45 – 60 मिनट |
| उदयपुर | 80 किमी | 1.5 – 2 घंटे |
| भीलवाड़ा | 95 किमी | 2 घंटे |
| कोटा | 200 किमी | 3.5 – 4 घंटे |
| अहमदाबाद | 335 किमी | 6 – 7 घंटे |
| जयपुर | 350 किमी | 6 – 7 घंटे |
| जोधपुर | 300 किमी | 5.5 – 6 घंटे |
| इंदौर | 340 किमी | 6.5 – 7 घंटे |
| दिल्ली | 615 किमी | 10 – 11 घंटे |
| मुंबई | 830 किमी | 15 – 16 घंटे |
यात्री सुविधाएं और रुकने की व्यवस्था (Accommodation)
Sanwaria Seth Temple मंडफिया अब एक सुव्यवस्थित कस्बा बन चुका है। यहाँ पर यात्रियों के रुकने की पर्याप्त व्यवस्था हैं –
- धर्मशालाएं: मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित कई किफायती और साफ-सुथरी धर्मशालाएं हैं (जैसे यशोदा विहार)।
- होटल्स: मंदिर के आसपास अब कई निजी होटल्स और गेस्ट हाउस भी खुल गए हैं।
- भोजन: यहाँ आपको शुद्ध शाकाहारी राजस्थानी भोजन आसानी से मिल जाएगा। मंदिर में ‘प्रसाद‘ के रूप में मिलने वाला मक्खन-मिश्री/लड्डू लेना न भूलें।
यात्रा को यादगार बनाने के टिप्स
- आसपास के स्थल: सांवलिया जी के दर्शन के बाद आप चित्तौड़गढ़ किला (40 किमी) और नाथद्वारा (Shri Nathadwara – 100 किमी) भी जा सकते हैं।
- पहनावा: मंदिर की गरिमा का ध्यान रखते हुए पारंपरिक और शालीन कपड़े पहनें।
- फोटोग्राफी: मंदिर के गर्भगृह के अंदर फोटोग्राफी वर्जित है, इसलिए नियमों का पालन करें।
- दलालों से बचें: पूजा या विशेष दर्शन के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति को पैसे न दें। मंदिर में सभी सेवाएं पारदर्शी हैं।
3-दिवसीय मेवाड़ दर्शन: ऐतिहासिक और आध्यात्मिक यात्रा
Day 1: चित्तौड़गढ़ – शौर्य और बलिदान की गाथा
आपकी यात्रा की शुरुआत मेवाड़ के गौरव चित्तौड़गढ़ से होगी।
- सुबह (09:00 AM – 01:00 PM): चित्तौड़गढ़ किला (भारत का सबसे बड़ा किला) देखें। यहाँ विजय स्तंभ, कीर्ति स्तंभ और राणा कुंभा पैलेस की वास्तुकला को निहारें।
- दोपहर (01:00 PM – 02:30 PM): स्थानीय रेस्टोरेंट में पारंपरिक राजस्थानी थाली (दाल-बाटी-चूरमा) का आनंद लें।
- शाम (03:00 PM – 05:30 PM): पद्मिनी पैलेस और किले के भीतर स्थित कालिका माता मंदिर के दर्शन करें।
- रात: चित्तौड़गढ़ में ही विश्राम करें। (यहाँ शाम को होने वाला ‘लाइट एंड साउंड शो’ देखना न भूलें)।
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Day 2: सांवलिया सेठ दर्शन और उदयपुर प्रस्थान
दूसरे दिन हम आपकी आस्था के केंद्र Sanwaria Seth Temple की ओर बढ़ेंगे।
- सुबह (07:00 AM): चित्तौड़गढ़ से निकलें (लगभग 45 मिनट का सफर)।
- सुबह (08:00 AM – 11:00 AM): Sanwaria Seth Temple (मंडफिया) पहुँचें। राजभोग आरती में शामिल हों और मंदिर की अद्भुत नक्काशी देखें। दान-पात्र की रौनक और भक्तों का उत्साह आपको दंग कर देगा।
- दोपहर (12:00 PM): मंडफिया में ही लंच करें और फिर उदयपुर की ओर प्रस्थान करें (लगभग 2 घंटे का सफर)।
- शाम (05:00 PM): उदयपुर पहुँचकर पिछोला झील में बोट राइड का आनंद लें और जग मंदिर का नजारा देखें।
- रात: उदयपुर में स्टे।
Day 3: उदयपुर – झीलों की नगरी का सौंदर्य
अंतिम दिन ‘पूर्व के वेनिस’ उदयपुर के नाम।
- सुबह (09:00 AM – 12:00 PM): सिटी पैलेस (City Palace) देखें। यह राजस्थान का सबसे बड़ा महल परिसर है। इसके बाद पास ही स्थित जगदीश मंदिर के दर्शन करें।
- दोपहर (01:00 PM – 03:00 PM): सहेलियों की बाड़ी और फतेह सागर झील की सैर करें।
- शाम (04:00 PM – 06:00 PM): बागोर की हवेली में राजस्थानी लोक नृत्य का शो देखें (यह अनुभव बहुत खास होता है)।
- रात: अपनी सुविधा के अनुसार उदयपुर एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन से घर वापसी।
यात्रा के लिए कुछ खास सुझाव (Expert Tips):
- परिवहन (Transport): यदि आप ग्रुप में हैं, तो उदयपुर से एक टैक्सी किराए पर लेना सबसे अच्छा है, जो आपको इन तीनों जगहों पर आसानी से घुमा सके।
- सांवलिया जी का प्रसाद: मंदिर के बाहर मिलने वाला विशेष ‘मावा प्रसाद’ घर ले जाना न भूलें।
- गाइड: चित्तौड़गढ़ किले में एक लाइसेंस प्राप्त गाइड जरूर लें, बिना कहानियों के किले का भ्रमण अधूरा है।
निष्कर्ष (Conclusion)
Sanwaria Seth Temple केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह अटूट विश्वास और समर्पण का केंद्र है। चाहे आप मानसिक शांति की तलाश में हों या अपने जीवन में समृद्धि की कामना रखते हों, ‘सांवलिया सेठ‘ के दरबार में हाजिरी लगाने से आपकी झोली कभी खाली नहीं रहती।
तो, अगली बार जब आप राजस्थान की योजना बनाएं, तो इस ‘चमत्कारिक सेठ’ के दर्शन के लिए एक दिन जरूर सुरक्षित रखें। जय सांवलिया सेठ!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
सांवलिया सेठ मंदिर(Sanwaria Seth Temple) कहाँ स्थित है?
यह मंदिर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया गाँव में स्थित है, जो चित्तौड़गढ़-उदयपुर हाईवे पर है।
सांवलिया सेठ को ‘सेठ’ क्यों कहा जाता है?
भक्त इन्हें अपना बिजनेस पार्टनर मानते हैं और अपनी कमाई का हिस्सा इन्हें समर्पित करते हैं, इसलिए इन्हें प्यार से ‘सेठ’ कहा जाता है।
क्या Sanwaria Seth Temple में प्रवेश का कोई शुल्क है?
नहीं, मंदिर में प्रवेश और दर्शन पूरी तरह से निःशुल्क हैं।
क्या Sanwaria Seth Temple के पास रुकने की व्यवस्था है?
हाँ, मंदिर ट्रस्ट की ओर से कई धर्मशालाएं और पास में ही प्राइवेट होटल्स उपलब्ध हैं।
Sanwaria Seth Temple जाने का सबसे अच्छा समय क्या है?
अक्टूबर से मार्च के बीच का समय सबसे अच्छा है, क्योंकि इस दौरान राजस्थान का मौसम सुखद रहता है।
क्या आप अपनी अगली यात्रा Sanwaria Seth Temple के लिए प्लान करना चाहते हैं? अगर आपके पास कोई और सवाल है, तो कमेंट में जरूर पूछें!

